भारतीय ज्ञान परंपरा में नई शिक्षा नीति ‘बैकबोन’ के समान : कुलपति

उत्तर प्रदेश
  1. रिपोर्ट:-शैलेन्द्र शर्मा

नई शिक्षा नीति में ज्ञान की समग्रता के दर्शन : प्रो. उदयन मिश्र

 

आजमगढ़।

महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ के फैकल्टी सेंटर स्थित सेमिनार हॉल में मंगलवार को ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ के अंतर्गत नई शिक्षा नीति-2020 को लेकर एक वृहद संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने की।

मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. उदयन मिश्र तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. शैलेश मिश्रा, प्रो. सर्वेश पांडे और प्रो. ऋषिकेश सिंह मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ की गई।

संगोष्ठी में नई शिक्षा नीति के पांच वर्ष पूरे होने के पश्चात इसके क्रियान्वयन में आ रही सामाजिक व व्यावहारिक चुनौतियों पर गहन चर्चा की गई।

कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है, लेकिन इसके प्रति समाज व छात्र-छात्राओं में कई भ्रम फैले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ शिक्षक और विद्यार्थी मेजर-माइनर जैसे शब्दों को लेकर अभी भी असमंजस में हैं। उन्होंने कहा कि “हमने विश्वविद्यालय में इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए शिक्षकों के सहयोग से निरंतर प्रयास किए हैं।”

उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत में स्थानीय भाषाओं को लेकर शुरू में आशंकाएं थीं, लेकिन जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि नीति में स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता दी गई है, इसे पूरे देश ने खुले दिल से अपनाया। कुलपति ने कहा कि तकनीकी विकास और नई शिक्षा नीति के चलते आज भारत वैश्विक मंच पर तेज़ी से उभर रहा है।

प्रो. उदयन मिश्र ने कहा कि “अब समय आ गया है कि बिना किंतु-परंतु के नई शिक्षा नीति को पूर्ण रूप से आत्मसात किया जाए। इससे न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि देश की प्रगति भी सुनिश्चित होगी।”

उन्होंने कहा कि शुरूआत में आलोचना करने वाले अब इस नीति के सकारात्मक परिणाम देख रहे हैं।

प्रो. शैलेश मिश्रा, प्रो. सर्वेश पांडे और अन्य वक्ताओं ने भी नीति की समग्रता, लचीलापन और भारतीय मूल्यों से जुड़ाव पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह नीति न सिर्फ तकनीकी रूप से दक्ष बनाएगी, बल्कि उन्हें वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार भी करेगी।

कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्र ने सभी अतिथियों के प्रति आभार जताते हुए ऐसे कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. देवेंद्र कुमार पांडे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर प्रो. दिलीप वर्मा, डॉ. शकील, प्रो. प्रशांत राय, डॉ. शिव प्रकाश शुक्ल, डॉ. महेश कुमार, डॉ. ऋतंभरा, डॉ. त्रिशिका, डॉ. विपिन, डॉ. रोहित, डॉ. जयप्रकाश सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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