जातिगत भेदभाव की मानसिकता से लखनऊ विकास प्राधिकरण कर रहा है कार्य
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार भ्रष्टाचार मुक्त सरकार की बात करती है, तमाम तरीके के नियम कानून में बदलाव भी कर रही है। लेकिन उत्तर प्रदेश में एक ऐसा भी विभाग है जो भ्रष्टाचार की सारी पराकाष्ठाओं को पार कर चुका है,इस विभाग में चपरासी से लेकर उच्च अधिकारी तक सभी भ्रष्टाचार में लिप्त है।
रिश्वतखोरी की बीमारी इस विभाग के लगभग 95% अधिकारी और कर्मचारियों के अंदर व्याप्त है।योगी सरकार धृतराष्ट्र बनी केवल तमाशा देख रही है।
आपको बतादें कि अभी भी लखनऊ विकास प्राधिकरण वर्ष 2010/12 के मानक के अनुरूप अनुसार कार्य कर रहा है और इसी मानक की आड़ में जमकर पूरी राजधानी में अवैध निर्माण का कार्य बहुत ही अच्छी तरीके से फल फूल रहा है।

जिसकी आड़ में लखनऊ विकास प्राधिकरण के कर्मचारी, अधिकारी दबाकर माल कमा रहे हैं। हालांकि कार्यवाही का भी तमाशा विभाग को सरकार को दिखाने का काम करती हैं,

वह तमाशा केवल एक विशेष समुदाय के लोगों को लेकर के किया जाता है,अभी कुछ महीनों पहले अकबरनगर में 50 सालों से रह रहे लोगों को घर से बेघर कर दिया और पूरे अकबरनगर को यह दिखा दिया गया कि अवैध है।अभी दो-चार दिन पहले कुछ रो- हाउस भी गिराए गए,उन रो-हाउस को बनाने वाले भी मुसलमान थे।

लेकिन पिछले लगभग 1 वर्ष से अधिक समय बीत गया जोन 6 के अंतर्गत अमीनाबाद क्षेत्र में गन्ने वाली गली एवं गौतम बुद्ध मार्ग पर बने मनीष कंशल एवं रुचि कंशल द्वारा किए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश पिछले 1 साल से केवल कागज पर दिया जा रहा है।
जब इस मामले में शिकायतकर्ता से पूछा गया कि उक्त मामले में अवैध निर्माण करता को 10 बार से भी अधिक भवन को खाली करने का आदेश विभाग द्वारा दिया गया, उसके बावजूद अवैध निर्माण के ऊपर कारवाई नहीं की जा रही तो उच्चअधिकारियों द्वारा यह कहा गया कि उस भवन में लोग रह रहे हैं,अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या अकबरनगर में जब हजारों लोग रह रहे थे और उन्हें विभाग ने बेघर कर दिया उस समय इनकी मानवता और उनके नियम कानून कहां चले गए थे।

इससे साफ जाहिर होता है यह सरकार के साथ-साथ विभाग भी भेदभाव की राजनीति की मानसिकता के साथ कार्य कर रहा है और सरकार की निगाह में अपनी पीठ थपथपाने का काम कर रहा है।जिसका कारण केवल इतना है कि इस अवैध निर्माण को अंजाम देने वाला व्यक्ति हिंदू है और व्यापारी है।

क्योंकि भारतीय जनता पार्टी चंदे के दम पर ही जिंदा है।योगी सरकार के इतना दम नहीं है कि इस भ्रष्ट निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कर सके।

जबकि इस व्यक्ति और इस व्यक्ति के कुछ सहयोगियों द्वारा मॉडल हाउस नयागांव पूर्व में भी पूरी तरीके से अवध अपार्टमेंट नाम का 9 मंजिला के अपार्टमेंट का निर्माण 2017/18 के बीच में किया गया, इस अवैध निर्माण में नोटबंदी के दौरान जमकर उस समय करोड़ों रुपए की हेरा फेरी की गई और उसी पैसे के दम पर इस अवैध निर्माण को अंजाम दिया गया।

जिस पर विभाग द्वारा कार्रवाई की गई,हालांकि मोटी रकम मिल जाने के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण के तत्कालीन भ्रष्ट अधिकारियों ने उस फाइल को ही गायब कर दिया।

सरकार को लुभाने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण जातिगत रूप से अवैध निर्माण पर कार्रवाई और सील करने का नाटक कर रहा है।
इतना ही नहीं अगर विभाग की बात करें, तो पूरे मॉडल हाउस में इस तरह की बहुमंजिला इमारतों का मकड़जाल फैला है,सारी इमारतों के निर्माणकर्ताओं से लखनऊ विकास प्राधिकरण के भ्रष्ट अधिकारियों ने जमकर रिश्वत ली है। उन्हीं के दम पर यह सारे अपार्टमेंट खड़े हैं, कार्यवाही के नाम पर केवल बिल्डिंग को सील करने का नाटक करने वाले लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी केवल अपनी पीठ थपथपाकर सरकार को बेवकूफ बनाने का कार्य कर रहे हैं।

हालांकि मनीष कंसल द्वारा बनाए गए,अमीनाबाद क्षेत्र जोन 6 गन्ने वाली गली से लेकर गौतम बुद्ध मार्ग तक बनाए गए, अवैध निर्माण के मामले में शिकायतकर्ता द्वारा जब इस मामले में विभाग के खिलाफ करवाई की जाने की बात कही गई, तब आनन-फानन में अधिकारियों ने उक्त अवैध निर्माण को सील करने की बात कही है,अब देखने वाली बात यह होगी कि इन रिश्वतखोर कर अधिकारियों द्वारा इस अवैध निर्माण को कब सील किया जाता है।

क्योंकि अगर इस भवन को सील नहीं किया जाता है,तो इससे साफ जाहिर होता कि उत्तर प्रदेश सरकार मतलब योगी सरकार भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली और जातिगत भेदभाव के साथ राजनीति करने वाली सरकार है।

जिसे केवल अपनी सत्ता के लालच है, लखनऊ विकास प्राधिकरण के चोर उचक्के,भ्रष्ट,हरामखोर अधिकारियों की जेब भरने से मतलब है।न्याय का कार्य करने से मतलब नहीं है,केवल हिंदू मुस्लिम की राजनीति करके अपनी राजनीतिक रोटी सेकने के साथ-साथ अपनी कुर्सी को बचाने का कार्य कर रहे हैं।
इस भ्रष्ट कार्य में पूरा सहयोग देने का कार्य लखनऊ विकास प्राधिकरण के भ्रष्ट अधिकारी कर रहे हैं।
हालांकि इस मामले में अब तो यह समय ही बताया कि मनीष कंसल द्वारा बनाए गए,इस अवैध निर्माण को लखनऊ विकास प्राधिकरण कबतक ध्वस्त करता है या इस अवैध निर्माण को कब तक सील करता हैं।यह तो आने वाला समय ही बताइएगा।हालांकि इस मामले में शिकायतकर्ता द्वारा बताया कि यदि एक सप्ताह के अंदर इस अवैधनिर्माण/शोरूम को सील नहीं किया गया,तो मजबूरी में लखनऊ विकास प्राधिकरण के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए मजबूर होगा जिसकी पूरी जवाबदेही लखनऊ विकास प्राधिकरण के संबंधित अधिकारियों की होगी।




