स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बनाम योगी आदित्यनाथ: गौ संरक्षण और एफआईआर विवाद पर बढ़ा टकराव, निष्पक्ष जांच की मांग तेज।



लखनऊ।।उत्तर प्रदेश में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच हालिया बयानबाज़ी और कानूनी घटनाक्रम को लेकर सियासी व धार्मिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। मामला गौ संरक्षण, दर्ज एफआईआर और जांच की निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों से जुड़ा है।
गौ संरक्षण पर उठे सवाल, सरकार का पक्ष
शंकराचार्य ने सार्वजनिक मंचों से गौ संरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि गौमाता की सुरक्षा के लिए और अधिक प्रभावी एवं ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
वहीं राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश में गौ संरक्षण के लिए अनेक योजनाएं संचालित हैं तथा अवैध गतिविधियों के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जा रही है।
एफआईआर और दबाव के आरोप
हाल ही में एक महंत द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर शंकराचार्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किए जाने की खबर सामने आई। मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंचा, जहां संबंधित आदेश पर सुनवाई भी हुई।
इसी बीच कथित पीड़ित पक्ष से जुड़े एक व्यक्ति ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए उस पर दबाव बनाया गया था। इस बयान के बाद पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है।
निष्पक्ष जांच की मांग
शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उन्हें प्रदेश की जांच एजेंसियों पर भरोसा नहीं है। उनका मत है कि जांच गैर-भाजपा शासित राज्य की पुलिस या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में होनी चाहिए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाले कथित झूठे आरोपों से वे बच सकें।
पुलिस जांच जारी
उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि मामला जांच के अधीन है और तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रिया
घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और धार्मिक संगठनों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय मान रहे हैं, तो कुछ इसे संत समाज और सरकार के बीच संवाद की आवश्यकता के रूप में देख रहे हैं।




