जातीय और परिवारवाद की राजनीति से जनता त्रस्त-लोकदल

Politics उत्तर प्रदेश

लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि चाहे बीजेपी हो, सपा हो या कोई भी अन्य राजनीतिक पार्टी आज लगभग सभी दलों में जातीय समीकरण और परिवारवाद हावी है। सत्ता और टिकट कुछ गिने-चुने परिवारों और जातीय समूहों तक सीमित होते जा रहे हैं, जबकि आम कार्यकर्ता और जनता के मुद्दे हाशिए पर हैं।

उन्होंने कहा कि ब्राह्मण, राजपूत (ठाकुर), पिछड़ा, दलित या किसी भी समाज के नाम पर राजनीति कर वोट बटोरना आसान रास्ता जरूर है, लेकिन इससे न तो किसानों की हालत सुधरती है, न युवाओं को रोजगार मिलता है और न ही महंगाई व गरीबी से राहत मिलती है।

सुनील सिंह ने कहा कि बीजेपी में ब्राह्मण और ठाकुर समाज के सम्मान की बातें चुनाव तक सीमित रहती हैं, वहीं अन्य दलों में भी जातीय और पारिवारिक वर्चस्व ने लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया है। यह राजनीति जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ है।

लोकदल अध्यक्ष ने कहा कि अगर शिवपाल यादव जी या कोई भी नेता इस सोच के साथ आगे आता है कि राजनीति जाति और परिवार से ऊपर उठकर होनी चाहिए और सभी समाजों को बराबरी का सम्मान मिले, तो लोकदल ऐसे विचारों का स्वागत करता है।

उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश की असली समस्याएँ किसान संकट, बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और गहराती गरीबी हैं। लोकदल जातीय और परिवारवादी राजनीति का विरोध करते हुए ब्राह्मण, राजपूत, पिछड़ा, दलित सहित सभी समाजों को साथ लेकर जनता के असली मुद्दों पर बात करने वाला दल है।

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