नहरों में पानी नहीं, खेत सूखे, नदी में बाढ़—सिंचाई विभाग पर किसानों ने लगाए गंभीर आरोप।

आजमगढ़, अगस्त जिले के किसान इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं। जहां एक ओर खेतों में नहरों से सिंचाई के लिए पानी नहीं आ रहा, वहीं दूसरी ओर बाढ़ से गांव के गांव उजड़ रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया है कि सिंचाई विभाग की लापरवाही से खेत सूखे पड़े हैं और घाघरा नदी में छोड़े गए अतिरिक्त पानी से हर साल भारी तबाही मचती है।
किसानों का आरोप है कि नहरों और माइनरों की सफाई कागजों पर होती है। जेसीबी मशीनों से सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है, जिससे नहरें पूरी तरह से जाम हो चुकी हैं और कई नहरें जंगल में तब्दील हो गई हैं। बताया गया कि सरायमीर स्थित शारदा सहायक खंड-32 की राजवाहा, फूलपुर से अम्बेडकरनगर जाने वाली नहर, मन्दुरी एयरपोर्ट होकर कप्तानगंज तक की मुख्य नहर सहित कई क्षेत्रों में अब तक पानी नहीं पहुंचा है।
ज्ञापन में किसानों ने बताया कि शारदा नदी का पानी नहरों में छोड़ने के बजाय सीधे घाघरा नदी में छोड़ा जाता है, जिससे आजमगढ़, मऊ और बलिया जिलों में बाढ़ आ जाती है। हर साल कई गांव कटाव की चपेट में आकर नदी में समा जाते हैं। दूसरी तरफ मैदानी इलाकों में पानी न होने से सूखा पड़ जाता है और फसलें चौपट हो जाती हैं।
किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी आजमगढ़ को सौंपा है, जिसमें विभागीय भ्रष्टाचार और उदासीनता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
सिल्ट सफाई में हुए घोटालों की जांच कर दोषियों पर एफआईआर।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पानी की आपूर्ति नहीं हुई और समस्याओं का समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।



