कुलपति, वरिष्ठ साहित्यकारों एवं कवियों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजन बना ऐतिहासिक
आजमगढ़। हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज एवं डीएवी पीजी कॉलेज आजमगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में कॉलेज के न्यू सेमिनार हॉल में “डॉ. कन्हैया सिंह का साहित्यिक प्रदेय” विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र प्रो. संजीव कुमार (कुलपति, महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय, आजमगढ़) की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जबकि द्वितीय सत्र की अध्यक्षता कृषि वैज्ञानिक एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री राम कठिन सिंह ने की।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रो. सुरेंद्र दुबे और डॉ. उदय प्रताप सिंह (पूर्व अध्यक्ष, हिंदुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज) रहे। इस अवसर पर डॉ. उदय प्रताप सिंह को “डॉ. कन्हैया सिंह साहित्य सम्मान – 2025” से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को कॉलेज के प्राचार्य प्रो. प्रेमचंद यादव और प्रबंध समिति के मंत्री आनंद प्रकाश श्रीवास्तव ने अपना संरक्षण एवं शुभकामनाएं प्रदान कीं। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में प्राध्यापक, शोधार्थी व छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही। कार्यक्रम का सफल संयोजन हिंदी विभाग की प्रभारी प्रो. गीता सिंह एवं सह संयोजन विभाग के सहायक आचार्य अवनीश राय ने किया।
करीब 10 घंटे तक लगातार चले इस तीन सत्रीय संगोष्ठी का अंतिम सत्र भव्य कवि सम्मेलन के रूप में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. भालचंद त्रिपाठी ने की, जबकि संचालन का दायित्व प्रो. अखिलेश चंद्र (गांधी पीजी कॉलेज माल्टारी) ने निभाया।
कवि सम्मेलन में प्रयागराज से पधारे श्री अग्निवेद्र सिंह ने “जिंदगी एक विचार है साईं…” जैसी रचना से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। श्री अभिषेक पांडेय ने “ना मैं जयशंकर, ना कबीर…”, श्री रजनीश यादव ने “जो खो दिया है, भुलाया भी तो जा सकता है…” और श्री जय हिंद सिंह ‘हिंद’ ने “जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान नहीं होता” जैसी रचनाओं से सभागार को भावविभोर कर दिया।
श्रीमती आशा सिंह ने “बिना कांटे के जीने का तजुर्बा नहीं…” से जिंदगी के संघर्ष को स्वर दिया। श्रीमती स्नेहलता राय, प्रो. गीता सिंह, डॉ. विनम्र सेन सिंह (इलाहाबाद विश्वविद्यालय),शैलेन्द्र मोहन राय ‘अटपट’, वरिष्ठ कवि सोहन लाल गुप्ता, तथा प्रो. अखिलेश चंद्र ने भी अपनी कविताओं से समां बांधा।विशेष रूप से भोजपुरी में बेटी बचाओ संदेश देती रचना “लेवे दिहे मोहे जनम हो…” को खूब सराहा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. भालचंद त्रिपाठी की ग़ज़ल “अभी भूखे कहां कुछ पा रहे हैं…” ने सामाजिक यथार्थ का सटीक चित्र खींचा।समापन अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार सिंह ने डॉ. कन्हैया सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए आयोजकों और सभी प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम की समापन घोषणा प्रो. अखिलेश चंद्र द्वारा की गई।