Ali Khamenei के निधन की खबर पर आजमगढ़ में शोक और आक्रोश, मदरसों में मजलिस, मुबारकपुर में हुआ प्रदर्शन



आजमगढ़। ईरान पर हमले के बाद तेहरान से शिया समुदाय के सर्वोच्च धार्मिक गुरु Ali Khamenei के शहीद होने की खबर जैसे ही आजमगढ़ पहुंची, जिले के विभिन्न इलाकों में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।
शिया समुदाय के लोग गमजदा नजर आए और अमेरिका व इजरायल के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की।
शहर के आसिफ गंज स्थित डॉक्टर बनर्जी के सामने की गली में स्थित मदरसे में शोक संवेदना को लेकर मजलिस का आयोजन किया गया। होली का पर्व होने के कारण शहर में कार्यक्रम मदरसे के अंदर ही आयोजित किया गया, जहां लोगों ने कुरान ख्वानी कर श्रद्धांजलि अर्पित की और गम का इजहार किया। उपस्थित लोगों ने कहा कि खामनेई केवल राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि शिया समुदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु थे, जिन्हें पिता से भी बढ़कर दर्जा दिया जाता था। उन्होंने उन्हें हजरत इमाम हुसैन के रास्ते पर चलने वाला और जालिम ताकतों के खिलाफ डटकर खड़ा रहने वाला व्यक्तित्व बताया।
वहीं मुबारकपुर नगर के दरबार-ए-हुसैनी, शाह मोहम्मदपुर मोहल्ले में भी शिया समुदाय के लोगों ने आक्रोश व्यक्त किया। रविवार को कई दुकानों को बंद कर लोग सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन कर विरोध जताया। इस दौरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की गई। कुछ लोगों ने भारत सरकार से इन देशों के साथ संबंध खत्म करने की मांग भी की।
कार्यक्रमों के दौरान सैयद मोहम्मद मेहंदी, मौलाना जमीरुल हसन, मौलाना सुल्तान, मौलाना गुलाम हैदर, मौलाना कल्बे हसन, सैयद आजाद हुसैन समेत अन्य लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि खामनेई ने जीवन भर अमन का पैगाम दिया और दबाव के बावजूद कभी अन्याय के सामने झुके नहीं।
जिले में शोक सभाओं के दौरान लोगों की आंखें नम रहीं और समुदाय ने इसे अपूरणीय क्षति बताया।




