नवाबों के शहर लखनऊ ने एक गरिमामयी और सारगर्भित शाम का साक्षी बना, जब प्रसिद्ध लेखिका दीपिका चतुर्वेदी की चर्चित पुस्तक “अलॉन्ग द बैंक्स ऑफ रिवर गोमती” पर विशेष चर्चा का आयोजन ला मार्टिनियर कॉलेज, लखनऊ के स्पेंस हॉल में किया गया। यह वही पुस्तक है जिसका लोकार्पण कुछ समय पूर्व उत्तर प्रदेश के माननीय राज्यपाल द्वारा किया गया था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहीं डा. मनुका खन्ना, कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय और सर गैरी डॉमिनिक एवरट, प्रिंसिपल, ला मार्टिनियर कॉलेज, लखनऊ। उनके साथ ही, विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहे डा. अखिलेश मिश्रा, आई.ए.एस., अतिरिक्त चुनाव आयुक्त, उत्तर प्रदेश तथा श्री पुलकित खरे, आई.ए.एस., प्रबंध निदेशक, यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन। दोनों वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए गोमती नदी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपनी उपस्थिति और विचारों से आयोजन की गरिमा बढ़ाई, जिनमें प्रमुख थे:
सर गैरी एवरट, प्रिंसिपल, ला मार्टिनियर बॉयज़ कॉलेज, जिन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए शिक्षा और विरासत की भूमिका पर बल दिया।
डा. कीर्ति विक्रम सिंह, क्षेत्रीय निदेशक (कार्यवाहक), इग्नू, लखनऊ, जिन्होंने नदी संरक्षण और शोध दृष्टिकोण पर अपनी बात रखी।
के.बी. पंत, सीईओ, डांस स्पोर्ट्स एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश, जिन्होंने सांस्कृतिक माध्यम से जागरूकता फैलाने पर जोर दिया।
गौरव प्रकाश, प्रतिष्ठित युवा उद्यमी और सामाजिक-आर्थिक प्रगति के पैरोकार, जिन्होंने अपने वक्तव्य में लखनऊ के प्रति गहरी भावनात्मक जुड़ाव और विकास की दृष्टि को साझा किया।
सुश्री इति श्री मिश्रा, जिन्हें “गोमती भक्त” कहा जाता है, जिन्होंने अपनी लेखनी से जनजागरूकता की नई लहर चलाई।
सुश्री ललिता प्रदीप, पूर्व अपर निदेशक शिक्षा एवं अब वकील, जिन्होंने शिक्षा और न्याय के नजरिये से गोमती का महत्व बताया।
“जलदूत” नंदकिशोर वर्मा, राष्ट्रीय जल हीरो एवं नीति आयोग द्वारा सम्मानित, जिन्होंने जल संरक्षण और गोमती की पुनर्बहाली को लेकर अपने मिशन की प्रेरक कथा साझा की।
इस चर्चा ने न केवल पुस्तक “अलॉन्ग द बैंक्स ऑफ रिवर गोमती” की साहित्यिक यात्रा का उत्सव मनाया, बल्कि लखनऊवासियों को यह संदेश भी दिया कि गोमती केवल एक नदी नहीं, बल्कि इस शहर की आत्मा और धड़कन है।
कार्यक्रम का समापन आभार व्यक्त के साथ हुआ और उपस्थित विशिष्टजनों ने इसे लखनऊ की सांस्कृतिक, बौद्धिक और सामाजिक चेतना का अनूठा संगम बताया।



