
लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने गरीबों के स्वास्थ्य के नाम पर सबसे बड़ा धोखा किया है। आयुष्मान कार्ड जैसी योजना को गरीबों तक पहुँचाने का दावा करने वाली सरकार ने इसमें ऐसी शर्तें रख दी हैं, जिससे असली गरीब परिवार योजना से बाहर कर दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कार्ड बनाने के लिए राशन कार्ड में 6 सदस्य होना अनिवार्य कर दिया है। सवाल यह है कि जिन परिवारों में 6 सदस्य ही नहीं हैं, उनके इलाज का क्या होगा? क्या उनका स्वास्थ्य अब सरकार की जिम्मेदारी नहीं है?गरीबों का खून चूसने वाली यह सरकार गरीब परिवारों के स्वास्थ्य का मज़ाक उड़ा रही है। यह योजना नहीं, बल्कि गरीबों को मृत्यु की ओर धकेलने वाली साज़िश है।सुनील सिंह ने कहा कि मोदी सरकार गरीबों के लिए नहीं, केवल अपने पूंजीपति मित्रों के लिए काम करती है। स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील ज़रूरत को भी उन्होंने जुमला और प्रपंच बना दिया है।
राशन कार्ड बायोमेट्रिक में भी किये गये बदलाव,जनता के बीच बायोमेट्रिक को लेकर आक्रोश

जिस प्रकार आयुष्मान कार्ड को लेकर सरकार ने राशन कार्ड में 6 व्यक्तियों के नाम को अनिवार्य कर दिया है। ठीक उसी प्रकार अभी तक राशन कार्ड धारकों को बायोमेट्रिक के नाम पर परिवार के किसी एक सदस्य के अंगूठे के आधार पर राशन का वितरण किया जा रहा था,परंतु इस महीने से राशन वितरण प्रणाली में भी सरकार को अब गरीब जनता के अंगूठे पर भी भरोसा नहीं है।
इसका सीधा मतलब यह निकाला जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए जनता केवल वोट बैंक का काम करने के लिए है,क्योंकि नए आदेश के अनुसार अब अंगूठे की बायोमेट्रिक मान्य नहीं होगी, कार्ड धारक की आंखों को स्कैन किया जाएगा।
जिसको लेकर तमाम जगहों पर कार्ड धारकों में आक्रोश की स्थिति उत्पन्न हो रही है,
भारतीय जनता पार्टी की सरकार केवल स्वयं को और उनके गिने-चुने पूंजी पति और कुछ स्वार्थी राजनीतिक गुरु ही भरोसेमंद है। जिस जनता के मतदान से भारतीय जनता पार्टी ने सरकार बनाई है।उस आम जनता के ऊपर भाजपा अविश्वास रखती है, आने वाले चुनाव में यही जनता भारतीय जनता पार्टी को करारा जवाब देने वाली है।
इस बात का बहुत ही अच्छी तरीके से भारतीय जनता पार्टी के नेता और उनके जुमलेबाज नेता याद रखें।
क्योंकि जिस दिन जनता जाग गई तो फिर भ्रष्टाचारी नेताओं की खैर नहीं है।साक्षात प्रमाण लोगों को देखने को मिल चुका है,कुछ साल पहले जो हाल श्रीलंका का हुआ था और अभी वर्तमान में जिस तरह की समस्या नेपाल में हुई है।
यह केवल तुगलकी फरमान सुनने के बाद ही हुई है,अगर यही हाल रहा तो आने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का सुपड़ा साफ हो जाएगा।



